गुर्दे की पथरी के उपचार का विकल्प
- Amit Bhat
- 4 hours ago
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उपचार की आवश्यकता
गुर्दे की सभी पथरियों को निकालने की आवश्यकता नहीं है ।
दर्द को काबू में करने के लिए और/या गुर्दे को नुकसान से बचाने के लिए पथरी निकलवाने की सलाह दी जाती है।
दर्द
तेज़ दर्द, जिस पर दर्द की दवाएँ असर नहीं कर रहीं हों ।
गुर्दे को नुकसान से बचाने के लिए
संक्रमण (इन्फेक्षन) की परीस्थिति में
पथरी जो फंस गई हो और गुर्दे पर दबाव डाल रही हो ।
अगर व्यक्ति की एक किडनी है और उसी में पथरी हो ।
अगर व्यक्ति के दोनों गुर्दे में पथरी हैं और यह अंदेशा हो कि इससे समस्याएं हो सकती हैं ।
गैर-चिकित्सा कारणों से निकलवाना
वे व्यक्ति जो जहाज/एयरलाइंस में काम कर रहे हों । उन्हें ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए मेडिकल क्लीयरेंस शायद न मिले ।
व्यक्तिगत पसंद जैसे, किसी विदेशी देश की यात्रा करने से पहले हटाना ।
उपचार का विकल्प
विभिन्न विकल्प हैं:
दवाएं
एंडोस्कोपिक सर्जरी
चीरा मारकर ऑपरेशन
लिथोट्रिप्सी
उपचार का उद्देश यह रहता है कि मरीज़ को पथरी से निजात भी मिल जाए और तकलीफ़ भी कम से कम हो । युरोलोजिस्ट/मुत्ररोग-विशेषज्ञ पथरी के आकार, संख्या, कठोरता और उसी समय ही किसी अन्य समस्या का इलाज करने की आवश्यकता जैसे कई कारकों का मूल्यांकन करने के बाद निर्णय लेते हैं कि कौनसा तरीका सही रहेगा ।
ओपन सर्जरी की आवश्यकता
आधुनिक तकनीक और चिकित्सा विशेषज्ञता में प्रगति के साथ, पथरी के लिए ओपन सर्जरी बहुत कम हो गई हैं । यह केवल कठिन या जटिल पथरी के लिए ही की जाती है या साथ में एक दूसरी समस्या भी है जिसका उसी समय ही शल्य चिकित्सा द्वारा इलाज करना आवश्यक हो ।
दवाओं से उपचार
कुछ पथरियों का इलाज केवल दवाओं से किया जा सकता है । छोटी एक/एक से ज्यादा पथरी का इलाज दवाओं से किया जा सकता है:
अगर लगातार दर्द नहीं हो रहा है
अगर किडनी पर दबाव नहीं आ रहा / नुकसान नहीं पहुंच रहा ।
अगर संक्रमण (इन्फेक्षन) नहीं है ।
पथरी की पुनरावृत्ति को रोकने हेतु ।
दवाओं के साथ सफलता दर
यह छोटे पथरियों के लिए कारगर साबित हो सकती है । पथरी जितनी बड़ी होगी, दवाओं से इलाज करना उतना ही कठिन होगा । केवल कुछ ही पथरियाँ दवाओं से घुल जाती हैं, अधिकांश घुलती नहीं हैं । हालांकि, छोटी पथरियाँ गिर जरूर जाती हैं । पथरी को गिरने में मदद करने के लिए दवाएं उपलब्ध हैं ।
पेशाब की तरह ही, पथरी भी गुर्दे में ही बनती है । पथरी, छोटे क्रिस्टल के रूप में शुरू होती हैं और फिर धीरे-धीरे आकार में बढ़ती हैं । कई बार ये पथरियाँ बिना तकलीफ़ दिए, गिर जाती हैं । अगर पथरी शरीर से बाहर नहीं गिरती हैं, तो उन्हें निकालना पड़ सकता है ।
हाइड्रोथेरेपी उपचार
हाइड्रोथेरेपी में, पेशाब के उत्पादन को बढ़ाने वाली दवाओं के साथ नसों में तरल पदार्थ (सलाईन) देना शामिल है । इसके पीछे की सोच यह है कि, पेशाब उत्पादन में वृद्धि होगी और पानी पथरी को बहाकर शरीर से बाहर निकाल देगा ।
यह मेरी राय है कि हाइड्रोथेरेपी कुछ प्रतिशत मामलों में ही काम करती है । यह कभी भी बड़ी पथरियों के लिए काम नहीं करेगी, जैसे कि 10 मि मी से बड़ी । इससे छोटी पथरी तो शायद स्वाभाविक रूप से बाहर निकल जाएगी । ऐसा इसलिए है क्योंकि पेशाब नली (पेशाबवाहिनी) में एक मांसपेशी की परत होती है जो पथरी को पंप करके आगे की ओर ढकेलती है । अगर, पेशाबवाहिनी की मांसपेशियों की पंपिंग प्रक्रिया, पथरी को बाहर धकेलने के लिए कारगर साबित नहीं हो रही, तो हाइड्रोथेरेपी से भी मदद मिलेगी, इसकी संभावना कम ही है ।
एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉकवेव लिथोट्रिप्सी (ESWL)
बहुत से लोग लिथोट्रिप्सी को लेजर मानने की गलती करते हैं । हालाँकि दोनों ही पथरियों को तोड़ने के लिए काम में आते हैं, लिथोट्रिप्सी और लेजर एक नहीं, दो अलग अलग चीजें हैं ।
कई बार मरीज लिथोट्रिप्सी पसंद करते हैं क्योंकि इसे सर्जरी नहीं माना जाता है ।
लिथोट्रिप्सी कैसे काम करती है?

सूरज की रोशनी कागज को जला नहीं सकती । लेकिन अगर लेंस के साथ किरणों को केंद्रित किया जाए तो सूरज की रोशनी भी कागज जला सकती है । शॉक वेव एक ऊर्जा स्रोत द्वारा उत्पन्न होती है । यह बहुत कमजोर ऊर्जा है और पथरी को नहीं तोड़ पाएगी । एक प्रकार के लेंस का उपयोग किया जाता है जो ऊर्जा को पथरी पर केंद्रित करता है । ऐसा करने से, यह धीरे-धीरे पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देगा । ये छोटे-छोटे टुकड़े आराम से, बगैर किसी परेशानी के, बाहर निकल जाएँगे ऐसी उम्मीद होती है ।
लिथोट्रिप्सी के नुकसान
परिणाम कितने कारगर होंगे, इसका अनुमान लगाना मुशकिल होता है । इसकी सफलता दर लगभग 70-75% है । बड़ी पथरी और सख्त पथरी शायद नहीं टूटेंगी । किडनी भी कुंठित आघात से ग्रस्त हो सकती है । यह पेशाब में खून के रूप में दिखाई दे सकता है । जबकि ज्यादातर समय गुर्दे पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, कुछ लोगों को लिथोट्रिप्सी के कारण सालों बाद रक्तचाप में वृद्धि हो सकती है ।
जो लोग खून पतला करने वाली दवाइयाँ लेते हैं, उनकेलिए लिथोट्रिप्सी उपयुक्त नहीं होगी ।
अगर पथरी टूट गई है, लेकिन टुकड़ा इतना बड़ा है कि बाहर नहीं निकल सकता, तो लिथोट्रिप्सी को दूसरी बार देने की आवश्यकता पड़ सकती है ।
एक प्लास्टिक ट्यूब (डबल जे स्टेंट) को गुर्दे में रखा जा सकता है ताकि पथरी के टुकड़ों को बाहर निकलने में मदद मिले और टुकड़े निकलते समय तकलीफ़ न दें ।
लिथोट्रिप्सी के बाद स्वास्त्य में सुधार (रिकवरी)
इस प्रक्रिया के बाद मरीज उसी दिन घर जा सकते हैं । उन्हें पेट के उस तरफ थोड़ा दर्द हो सकता है और कुछ दिनों के लिए पेशाब लाल (खून) जा सकता है । यह पूरी तरह से सामान्य है ।
वे 2-3 दिनों में अपनी सामान्य गतिविधि फिर से शुरू कर सकते हैं ।
मरीजों को तरल पदार्थ का ज़्यादा मात्रा में सेवन करना चाहिए । इससे पेशाब में जो खून जा रहा है, उसे साफ़ करने में मदद मिलेगी, और यह पथरी के टुकड़ों को बाहर निकालने में भी सहायक हो सकती है ।
कुछ दर्द महसूस हो सकता है, जब पथरी के टुकड़े पेशाबवाहिनी से होकर निचे की ओर गुजरते हैं । यह अपने आप ही ठीक हो जाएगा ।
बेहतर विकल्प
लिथोट्रिप्सी की टैकनोलोजी को अब लगभग 50 वर्षों से अधिक हो गए हैं । अब बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें असली लेज़र भी शामिल है ।
पथरी निकालने के लिए एंडोस्कोपी
विकल्पों में शामिल हैं:
यूरेटेरोस्कोपी (यूआरएस)
पर्क्यूटेनियस नेफ्रोलिथोट्रिप्सी (पी सी एन एल/पी एन एल)
रेट्रोग्रेड इंट्रारेनल सर्जरी (आर आई आर एस)
पेशाबवाहिनी में पथरी के इलाज के लिए यूरेटेरोस्कोपी (ureteroscopy) का उपयोग करके किया जाता है । जबकि किडनी में पथरी का इलाज पी सी एन एल या आर आई आर एस से मैनेज किया जाता है । गुर्दे में पथरी अगर बड़े आकार (2 से मी से अधिक) की है तो आमतौर पर पी सी एन एल द्वारा निपटाया जाता है । इससे छोटी पथरी का इलाज आर आई आर एस (RIRS) से भी किया जा सकता है ।
यूरेटेरोस्कोपी (यू आर एस / URS )
एक बहुत ही बारीक 2 mm का एंडोस्कोप मूत्रमार्ग और मूत्राशय से होते हुए मूत्रवाहिनी तक डाला जाता है । जब पथरी दिखाई दे जाती है, तो उसे एक छोटी-सी टोकरी की मदद से बाहर निकाला जा सकता है । बड़ी पथरी को निकालने से पहले, उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ना ज़रूरी होता है । सर्जरी के बाद, एक डी जे स्टेंट रखने की ज़रूरत पड़ सकती है ।

यू आर एस के बाद स्वास्त्य में सुधार (रिकअवरी)
इस प्रक्रिया के बाद, मरीज़ अगले दिन घर जा सकते हैं । उन्हें पेट के बगल में थोड़ा दर्द हो सकता है और कुछ दिनों के लिए पेशाब लाल रंग (खून) का भी जा सकता है । यह पूरी तरह से सामान्य है ।
वे 2-3 दिनों में अपनी सामान्य गतिविधि फिर से शुरू कर सकते हैं ।
मरीजों को तरल पदार्थ का ज़्यादा मात्रा में सेवन करना चाहिए । इससे पेशाब में जो खून जा रहा है, उसे साफ़ करने में मदद मिलती है, और इस से पथरी के टुकड़ों को बाहर निकालने में भी सहायता हो सकती है ।
कुछ दर्द महसूस हो सकता है, जब पथरी के टुकड़े पेशाबवाहिनी से होकर, निचे की ओर गुजरते हैं । यह अपने आप ही ठीक हो जाएगा ।
यदि डीजे स्टेंट लगाया गया है, तो मरीज़ को मूत्राशय में कुछ उत्तेजना महसूस हो सकती है । इसके लक्षणों में बार-बार पेशाब के लिए जाने की ज़रूरत महसूस होना, पेशाब करने के लिए तेज़ी से भागना और पेशाब करते समय दर्द होना शामिल है । आमतौर पर, यह परेशानी कुछ ही दिनों में कम हो जाती है या पूरी तरह से चली जाती है ।
यू आर एस - क्या यह ऑपरेशन सुरक्षित है?
आधुनिक और बारीक यूरेटेरोस्कोप ने इस प्रक्रिया को बेहद सुरक्षित बना दिया है । इसमें किसी भी तरह की जटिलता होने की संभावना 100 में से 1 से ज़्यादा नहीं होती ।
पर्क्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (पी सी एन एल / PCNL )
किडनी में बड़ी पथरी होने पर पी सी एन एल (PCNL) का चुनाव किया जाता है । इसमें मरीज़ को पेट के बल लिटाया जाता है । फिर, उसकी पीठ के ऊपरी हिस्से में लगभग आधा सेंटीमीटर का एक छोटा-सा चीरा लगाया जाता है । इस चीरे से, किडनी को भेद कर, पथरी तक पहुँचने के लिए एक रास्ता बनाया जाता है । इसके बाद, 'नेफ्रोस्कोप' नामक एक एंडोस्कोप अंदर डाला जाता है, जिसकी मदद से पथरी को देखकर, उसे तोड़ा जाता है और टुकड़ों को फिर बाहर निकाल लिया जाता है ।

इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद, दो ट्यूब लगाई जा सकती हैं । एक पूरी तरह से अंदर होती है और बाहर से दिखाई नहीं देती; इसे DJ स्टेंट कहते हैं । दूसरी ट्यूब उस रास्ते में लगाई जाती है जो किडनी तक पहुँचने के लिए बनाया गया है।
पी सी एन एल के बाद स्वास्त्य में सुधार (रिकअवरी)
पी सी एन एल के बाद, मरीज आमतौर पर अस्पताल में 3-4 दिन बिताते हैं । सर्जरी के बाद एक्स-रे किया जा सकता है ताकि यह जांचा जा सके कि पथरी के सभी टुकड़े निकाल दिए गए हैं ।
3-4 मि मी से कम छोटे टुकड़े कोई मायने नहीं रखते, और उन्हें निकालने की कोशिश नहीं की जाती क्योंकि यह पेशाब के बहाव के साथ गिर जाते हैं । हालांकि, अगर कोई टुकड़ा 8-9 मि मी या उससे बड़ा है, तो इसे दूसरी प्रक्रिया के साथ निकालने की आवश्यकता होगी । यह आमतौर पर एक बड़ी या जटिल (complicated) पथरी के मामले में होता है ।
अगर पथरी के सभी टुकड़े निकाल लिए गए हैं, तो बगल से बाहर आ रही नली को निकाल दिया जाता है और मरीज़ को अस्पताल से छुट्टी दे दी जा सकती है ।
मरीजों को 1-2 सप्ताह के बाद अपनी सामान्य गतिविधि फिर से शुरू करने की सलाह दी जाती है ।
पी सी एन एल - क्या यह ऑपरेशन सुरक्षित है?
हालांकि पी सी एन एल आम तौर पर एक सुरक्षित ऑपरेशन, फिर भी इसमें कुछ जटिलताएं पैद हो सकती हैं । इनमें सबसे महत्वपूर्ण है गंभीर खूनस्राव, जिसके लिए खून चढ़ाने (blood transfusion) की आवश्यकता पड़ सकती है ।
रेट्रोग्रेड इंट्रा रेनल सर्जरी (आर आई आर एस / RIRS)
एक विशेष लचीला एंडोस्कोप, जिसे सिरे पर मोड़ा जा सकता है, मूत्रमार्ग, मूत्राशय से होते हुए मूत्रवाहिनी और फिर किडनी के अंदर तक डाला जाता है । लचीलेपन और मुड़ने की क्षमता के कारण यह एंडोस्कोप, किडनी के विभिन्न कोनों तक पहुँच पाता है । जब पथरी दिखाई दे जाती है, तो लेज़र की मदद से उसे रेती जैसे बारीक कणों में चूरा कर दिया जाता है ।

आरआईआरएस के बाद रिकअवरी
इस प्रक्रिया के बाद, मरीज़ अगले दिन घर जा सकते हैं । उन्हें पेट के बगल में थोड़ा दर्द हो सकता है और कुछ दिनों के लिए पेशाब लाल रंग (खून) का भी जा सकता है । यह पूरी तरह से सामान्य है ।
वे 2-3 दिनों में अपनी सामान्य गतिविधि फिर से शुरू कर सकते हैं ।
मरीजों को तरल पदार्थ का ज़्यादा मात्रा में सेवन करना चाहिए । इससे पेशाब में जो खून जा रहा है, उसे साफ़ करने में मदद मिलती है, और इस से पथरी के टुकड़ों को बाहर निकालने में भी सहायता हो सकता है ।
कुछ दर्द महसूस हो सकता है जब पथरी के टुकड़े मूत्रवाहिनी से होकर नीचे की ओर गुजरते हैं । यह अपने आप ही ठीक हो जाएगा ।
यदि डीजे स्टेंट लगाया गया है, तो मरीज़ को मूत्राशय में कुछ उत्तेजना महसूस हो सकती है । इसके लक्षणों में बार-बार पेशाब के लिए जाने की ज़रूरत महसूस होना, पेशाब करने के लिए तेज़ी से भागना और पेशाब करते समय दर्द होना शामिल है । आमतौर पर, कुछ ही दिनों में यह परेशानी कम हो जाती या पूरी तरह चली जाती है ।
आरआईआरएस – क्या यह ऑपरेशन सुरक्षित है?
आधुनिक बारीक लचीले यूरेटेरोस्कोप ने इसे एक अत्यंत सुरक्षित प्रक्रिया बना दिया है । जटिलता की संभावना 5 प्रतिशत से कम नहीं है । इसमें शामिल तकनीक के कारण महंगा होने के बावजूद, यह पी सी एन एल की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित है ।
विभिन्न उपचार प्रणालियों के अपने अपने जोखिम / जटिलताएँ
कुछ जोखिम जो सभी सर्जिकल प्रक्रियाओं से जुड़े हो सकते हैं, वे हैं रक्तस्राव (bleeding) और संक्रमण (infection) की संभावना ।
सभी प्रक्रियाओं के साथ थोड़े बहुत रक्तस्राव की आशंका बनी रहती है । हालांकि, इसकी संभावना बहुत कम है कि लिथोट्रिप्सी और यू आर एस के कारण ज़्यादा रक्तस्राव होगा । पी सी एन एल में, गंभीर खूनस्राव होने का जोखिम अधिक होता है । कभी-कभी खून चढ़ाने की ज़रूरत पड़ सकती है ।
यू आर एस में, एक छोटी सी संभावना है कि प्रक्रिया के दौरान मूत्रवाहिनी की परत क्षतिग्रस्त या फट सकती है । अगर ऐसा होता है, तो तीन छह सप्ताह के लिए स्टेंट लगाना आमतौर पर क्षतिग्रस्त जगह को भरने के लिए पर्याप्त होता है ।
पेशाबवाहिनी का पूरी तरह से फट जाने की संभावना बहुत कम होती है । लेकिन इस फटे हुए हिस्से की मरम्मत के लिए ओपन सर्जरी की आवश्यकता होती है ।
पी सी एन एल के दौरान, अगर पथरी तक पहुँचने का रास्ता किडनी के ऊपरी हिस्से से होकर गुज़रता है, तो इस बात की थोड़ी संभावना रहती है कि छाती के अंदर, फेफड़े के आस-पास, हवा या पानी जमा हो जाए । इस से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है ।
अगर पथरी तक पहुँचने का रास्ता किडनी के ऊपरी हिस्से से होकर गुज़रता है, तो इस बात की थोड़ी संभावना रहती है कि फेफड़े के आस-पास, छाती में हवा या तरल पदार्थ जमा हो जाए । इन समस्याओं के इलाज के लिए छाती के अंदर एक नली रखी जा सकती है, जिससे फेफड़े के आस-पास जमा हवा या पानी बाहर निकल जाता है । अन्य दुर्लभ जटिलताओं में और ।
अन्य जटिलताएं जिनके होने कि संभावना बहुत ही कम हैं वे हैं - आंतड़ी में चोट लगना किडनी को प्रवाहित करनेवाली खून वाहिकाओं में चोट लगना शामिल है ।





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